संगरूर:
भारत माता के
महान सपूत सवतंत्रता सेनानी
शहीद मुख्तियार सिंह
सिंह का आज
निधन हो गया
वह 78 वर्ष के
थे.उनका अंतिम
संस्कार दिड्बा के
गाँव कुनाल खुर्द
के श्मशान घाट
में किया गया.सवतंत्रता सेनानी
मुख्तियार सिंह के
संस्कार के मोके
एडिशनल डिप्टी कमिश्नर स
प्रीतम सिंह जोहल
और डी.एस.पी दिड्बा
बलजिंदर सिंह ने
सरकारी सन्मान के
उन्हें अंतिम विदाई
देते श्रधा के
फूल भेंट किए.
शहीद के ऊपर
तिरंगा झंडा डाल
प्रशासन ने शहीद
के परिवार के
साथ दुःख बांटा
.वहीँ पंजाब पुलिस
की एक टुकड़ी
ने हथियार उलटे
कर हवाई फायर
करते शहीद को
श्रधान्जली दी.और
उनकी आत्मिक शांति
के लिए दो
मिनट का मोन
धारण किया.
Sangrur Info.
Information
Sunday, 12 February 2012
Saturday, 11 February 2012
सर्दी में हो रहा बदलाव किसानो के लिए परेशानी का सबब ,कभी फायेदा कभी नुकसान
संगरूर: ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव अब जैसे हमारे जीवन में नजर आना शुरू हो गया हो और इससे सामने आने वाली परेशानियाँ भी मुश्किलों का सबब बन रही हैं.सर्दी के इस मौसम में हर दिन बदलाव नजर पड़ता है जिसमे कभी सर्दी कम होती है तो तापमान बदना शुरू हो जाता है तो वहीँ कभी एक रात में ही मौसम करवट लेते एक दम से तापमान पहाड़ी क्षेत्रों म...ें बर्फबारी होने के चलते फिर से निचे गिर एक दम से सर्दी बाद जाती है जहाँ इसका आम जनजीवन पर असर देखने को मिलता है तो वहीँ इसका असर किसानी को प्रभावित कर रहा है .जिसके चलते किसान असमंजस में है कियुनकी जहाँ सर्दी बाद जाती है तो कोरे की मर पदनी शुरू हो जाती है तो सब्जी की किसानी करने वाले किसानों के लिए मुसीबत कड़ी हो जाती है जो जायदा सर्दी के कारन कई सब्जियां खराब हो जाती है और किसान को आर्थिक तोर आर तोड़ देता है वहीँ अगर इस मौसम में तापमान बदना शुरू हो जाए टी गेहूं की फसल पर इसकी मार देखने को मिलती है जिस से फसल के जल्दी पकने का दर सताता रहता है जिस से झड कम निकलता है.किसान बताते हैं के वो मौसम में होने वाले बदलाव से लगातार डिप्रेशन में हैं कियुनकी जहाँ वितीय तोर पर पनब की किसानी पहले से कमजोर है वहीँ कुदरत भी उके साथ क्या खेल खेल जाए कुछ मालूम नहीं चलता सब्जी की किसानी करने वाले किसान शफी मुहमद बताते हैं के सर्दी बढने के चलते लगे गई फसलों पर इसका काफी बुरा प्रभाव पड़ता हैवहीँ दूसरी तरफ गेहूं की किसानी करने वाले किसान अमनदीप,धर्म सिंह बताते हैं के अगर तापमान जैसे पहले बढ़ने लगा था तो वो गेहूं की फसल के लिए अच्छा नहीं है जिस से फसल के जल्दी पकने का खतरा बना रहता है और अगर एसा होता है तो फसल में झड कम होगा और पदावर अछि नहीं होगी.किसी के लिए जायदा सर्दी अछि तो किसी के लिए कम इस असमंजस के माहोल में किसान परेशानियों में डूबा हुआ है और कुदरत के सामने फरियाद लगा रहा है तो माहिरों का कहना है के मौसम के इस बदलते माहोल में वो कोशिश करते हैं के मौसम के हिसाब से ही वो बीज तयार करें और किसान उनके दुआरा दिए सुझावों को मान कर चलें .किसानी माहिर डॉ मनदीप सिंह बताते हैं के पंजाब किसानी युनिवर्सटी दुआरा भी इस बदलाव को दर्ज किया गया है लेकिन हमारी कोशिश रहती है के किसान हमारे सुझावों को मने जिस से उनकी फसल पर बदलते मौसम का कोई परभाव न पड़े लेकिन कुछ किसान इनकी तरफ ध्यान नहीं देते या फिर फसल की बिजी के समय अछे बीज नहीं लगते जिस से परेशानी हो जाती .
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