संगरूर शहर के नाम को लेकर कई तरह की कहानिया है असल हकीकत क्या है ये इतिहास खंगालने पर
ही सामने आ सकता है जिस पर कई इतिहासकार काम कर चुके हैं या लगे हुए हैं.लेकिन यहाँ
के बारे में देखें तो राजा महाराजा शासन की सुन्दर झलकियाँ आज भी देखने को मिलती
हैं जिन में यहाँ का एतहासिक बनासर बाग़ ,दीवान खाना,अजायब घर,शाही स्माधें जैसी
एतहासिक इमारतें आज भी उस समय की गवाह हैं वो अलग बात है
के प्रशासनिक लापरवाही कहें या सरकार की तरफ से इनकी देख रेख सही तरह से न करने
के कारन आज ये अपनी खूबसूरती तो खो ही रहे हैं साथ झर झर हो नष्ट होने की कगार पर
हैं. वहीँ शहर के हिस्सों पहचानने के लिए यहाँ पर चार गेट हुआ करते थे धुरी
गेट,सुनामी गेट,पटियाला गेट,नाभा गेट जो शहर एक डिब्बे की तरह बंद कर देते थे
,लेकिन वो गेट तो आज नहीं लेकिन चारों गेट के पास बने धार्मिक सथल आज भी स्थापित
हैं और वहां पर पूजा पाठ होता हैं जिन में गुरुदुआरा साहिब देखा जाये तो
चारों गेटों की जगह पर है.वहीँ प्राचीन माता कलि देवी मंदिर अतियाला गेट की तरफ
स्थित है जो भारत के माता काली देवी मंदिरों में से खास तोर पर एक है.यहाँ पर
धार्मिक स्थान खास महत्व रखते हैं और सभी धर्म के लोग यहाँ एकता और भाईचारे के साथ
रहते हैं यही कारन है के पंजाब ने बुरे अच्छा समय देखा है लेकिन इस क्षेत्र में
काफी कोई बड़ी घटना या हादसा नहीं हुआ है जिस कारन लोग मानते हैं के भगवान का
आशीर्वाद हमेशा संगरूर पर रहा है.यहाँ पर एतहासिक गुरुदुआरा नन्कियाना साहिब,कुछ
ही दूर संत अत्तर सिंह का तपस्वी स्थल मस्तुआना साहिब जहाँ
पर शिक्षण संसथान नई पीढ़ी के लिए ज्ञान का भंडार है और श्रधालुओं के लिए गुरुदुआरा
साहिब हैं,तपस्वी बाबा नगन जी की समाधि जहाँ पर सभी धर्म के लोग
आ उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.संगरूर के धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी हम
आपको अपने धार्मिक पेज में विस्तार से बताएँगे.बाकि यहाँ का इतिहास खंगालने और आज
के समय को देखें तो परिवर्तन कई तरह के हैं लेकिन लोगों का प्यार और एकता की बात
करें तो वो इस कद्र बंधी हुई है के शायद ही किसी और जगह देखने को मिले यही कारन है
के दुःख और सुख के समय पूरा शहर एक दुसरे के साथ हर समय एकजुट रहता है.अंत में इतना
कहेंगे के अगर कोई बात गलत लगे तो हमें मेल कर जानकारी दे सकते हैं और हमारे और
दूसरों के ज्ञान के लिए अहम योगदान डाल सकते हैं

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